Saturday, March 7, 2020

बदफ़ैलसूफ़ियत

बदफ़ैलसूफ़ियत
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क्रिकेट में तेज गेंदबाजी के नियम जीवन के एक बहुत बड़े रहस्य को उजागर कर देते हैं: गेंद स्विंग करानी हो तो पेस से समझौता करना पड़ेगा और यदि पेस डालनी हो तो गेंद स्विंग नही होगी।
जीवन एक प्रवाह है, एक नदी, एक दरिया। या तो आपका जीवन अपने आप मे डूबकर (अयमात्मा ब्रह्म) बहुत गहरा हो जाएगा या यदि गहरा नही हुवा तो उस पठारी नदियों की तरह उच्छशृंखल, और किसी को भी थोड़ी सी बरसात में छू लेने वाला बन जाएगा। 
आप एक ही साथ गङ्गा और गर्गा नही बन सकते; एक विशेषता के साथ समझौता करना ही पड़ता है हाँ ये ज़रूर है कि यदि आपका जीवन गङ्गा बनता है तो लोग-बाग उसको छूने आते हैं। 
भारतीय दर्शन के महान ज्ञाता "एस एन दासगुप्ता" ने लिखा है कि भारतीय दर्शन ने वैविध्य की दिशा में जो खोया वो गहराई की दिशा में पा लिया, और चूंकि दर्शन भी, संस्कृती भी, निर्जीव नही होते, इनमे और मानवीय जीवन मे एक साम्य ढूंढा जा सकता है। गरज ये कि गहराई की दिशा में जो खो जाए उसे वैविध्य कि दिशा में प्राप्त किया जाय।

और चिंता की बात क्या, गर्गा का पानी भी गङ्गा की तरह सागर में ही मिलना है; पेस हो या स्विंग दोनों ही को या तो बैट्समैन मारेगा या आउट होगा।

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फिर से वही शेर

दानिशमंदी बादशाही न मालो असबाब की फिकर
घनचक्करी करता रहूँ, ज़िंदगी गुजरे मेरी फकीराना।

हद हद जपे सो औलिया, बेहद जपे सो पीर
हद अनहद दोनों जपै सो वाको नाम फकीर

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