रिलीजियस टेक्स्ट का आप लिटरल अर्थ लेकर समझ ही नही सकते।
रिलिजयस टेक्स्ट की भाषा एक अलग स्तर की होती है, परत दर परत मायने, भाषा का असंज्ञानात्मक प्रयोग, विरोधाभास, टूटे, विचित्र और अजीबो गरीब वाक्य विन्यास, अपने ही अर्थ का अतिक्रमण करते हुए शब्द, चेतना के एक अलग स्तर पर जन्मी प्रतिकात्मताएँ, इतिहास की धूल, तत्कालीन समाज के स्वप्नों पर हजारों साल से हर नए समाज के स्वप्न की चढ़ती परतें, कुछ मृत हो चुके शब्द, कुछ शब्द जिनका कोई मानी ही नही, कुछ मानी जिनके लिए कोई शब्द ही नही, धर्मग्रन्थो को समझने के लिए मशक्कत करनी पड़ती है जी!
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